मंगल ग्रह के दिल की खोज: ‘Marsquakes’ ने खोला Solid Core का राज़; कल्पना कीजिए, हमारी पृथ्वी की तरह मंगल ग्रह का भी दिल – यानी उसका कोर – ठोस है! जी हां, हाल ही में वैज्ञानिकों ने मंगल पर होने वाले भूकंपों, जिन्हें हम ‘मार्सक्वेक’ कहते हैं, के डेटा से यह पता लगाया है। यह खबर इतनी ताजा है कि अभी-अभी, सितंबर 2025 में, एक चीनी नेतृत्व वाली रिसर्च टीम ने इसे दुनिया के सामने रखा है।
हाल ही में वैज्ञानिकों को मंगल ग्रह पर एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मंगल पर आने वाले “Marsquakes” (यानी मंगल ग्रह के भूकंप) ने यह संकेत दिया है कि इस ग्रह का भी एक ठोस कोर (Solid Core) है – बिल्कुल हमारी पृथ्वी की तरह।
यह खोज न केवल वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अहम है बल्कि यह हमें मंगल ग्रह के अतीत, वर्तमान और भविष्य के बारे में गहराई से समझने में मदद करती है।

मंगल ग्रह: लाल ग्रह की रहस्यमयी दुनिया
सबसे पहले, थोड़ा बैकग्राउंड। मंगल ग्रह, जिसे हम ‘रेड प्लैनेट’ कहते हैं, सूरज से चौथा ग्रह है। यह पृथ्वी से आधा छोटा है – इसका व्यास लगभग 6,780 किलोमीटर है, जबकि पृथ्वी का 12,742 किलोमीटर। मंगल की सतह लाल रंग की है क्योंकि वहां आयरन ऑक्साइड यानी जंग जैसा पदार्थ फैला हुआ है। वैज्ञानिकों को हमेशा से मंगल में दिलचस्पी रही है क्योंकि यह पृथ्वी जैसा लगता है – वहां पहाड़, घाटियां, और यहां तक कि सूखे नदी के बिस्तर भी हैं, जो बताते हैं कि अरबों साल पहले वहां पानी बहता होगा।
दरअसल, मंगल ग्रह के अंदरूनी हिस्से में धीरे-धीरे सिकुड़न और ठंडा होने की प्रक्रिया जारी है। इसी प्रक्रिया के कारण ग्रह के अंदर दबाव (Stress) बनता है और जब यह दबाव सतह या चट्टानों में टूटन पैदा करता है, तो वह झटके “Marsquake” के रूप में महसूस होते हैं।
NASA के InSight Lander मिशन ने इन Marsquakes की सबसे पहली रिकॉर्डिंग की थी। इसने मंगल की सतह पर सीस्मोमीटर लगाकर कंपनों (Seismic Waves) को मापा।
Marsquakes ने खोला राज़: NASA के InSight मिशन की भूमिका
मंगल (Mars) हमेशा से वैज्ञानिकों और आम लोगों के लिए रहस्यमयी ग्रह रहा है। लाल ग्रह पर जीवन की संभावना, पानी की खोज और इंसानों के भविष्य के मिशन ने इसे चर्चाओं में बनाए रखा है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने मंगल पर एक बड़ी खोज की है
मंगल (Mars) हमेशा से वैज्ञानिकों और आम लोगों के लिए रहस्यमयी ग्रह रहा है। लाल ग्रह पर जीवन की संभावना, पानी की खोज और इंसानों के भविष्य के मिशन ने इसे चर्चाओं में बनाए रखा है। हाल ही में वैज्ञानिकों ने मंगल पर एक बड़ी खोज की है – वहाँ आने वाले Marsquakes (यानी मंगल पर आने वाले भूकंप जैसे झटके) ने यह साबित कर दिया है कि मंगल के अंदर भी एक ठोस कोर (Solid Core) है, ठीक हमारी पृथ्वी की तरह।
मंगल की गहराइयों को समझने के लिए NASA ने 2018 में InSight Lander मिशन भेजा। इसने मंगल की सतह पर एक बेहद संवेदनशील सीस्मोमीटर लगाया, जिसने हजारों Marsquakes रिकॉर्ड किए।
NASA InSight मिशन की भूमिका मंगल का ‘हार्ट चेकअप’
नासा ने 2018 में इनसाइट लैंडर को मंगल पर उतारा, इसका पूरा नाम है ‘इंटीरियर एक्सप्लोरेशन यूजिंग सिस्मिइन्वेस्टिगेशंस, जियोडेसी एंड हीट ट्रांसपोर्ट’। सरल शब्दों में, यह मंगल के अंदरूनी हिस्से का अध्ययन करने के लिए था। लैंडर मंगल की एक सपाट जगह पर उतरा, जहां उसने एक सिस्मोमीटर लगाया – यह एक ऐसा यंत्र है जो भूकंप की तरंगों को पकड़ता है।
इस नई स्टडी में, चीनी वैज्ञानिकों की टीम ने इनसाइट के 23 मार्सक्वेक के डेटा का विश्लेषण किया। ये भूकंप लैंडर से 1,200 से 2,360 किलोमीटर दूर हुए थे। टीम ने देखा कि इन तरंगों से पता चलता है कि मंगल का सबसे अंदरूनी हिस्सा ठोस है।
1- इसने हजारों Marsquakes रिकॉर्ड किए।
2- इन झटकों से निकलने वाली Seismic Waves का विश्लेषण करके वैज्ञानिकों ने पता लगाया कि मंगल के अंदर क्या है।
3- परिणाम चौंकाने वाले थे – डेटा से पता चला कि मंगल ग्रह का कोर सॉलिड (Solid) है, बिल्कुल पृथ्वी की तरह।
डिस्कवरी के डिटेल्स: मंगल का ठोस कोर कैसा है? कोर की खासियतें
अब मुख्य बात। स्टडी के मुताबिक, मंगल का इनर कोर ठोस है, और यह ग्रह के सेंटर से लगभग 613 किलोमीटर (380 मील) तक फैला है।
इसके चारों ओर एक बड़ा लिक्विड आउटर कोर है, जो 613 किलोमीटर से शुरू होकर 1,800 किलोमीटर (1,100 मील) तक जाता है। पहले की स्टडीज में सोचा जाता था कि पूरा कोर लिक्विड है, लेकिन अब पता चला कि अंदर ठोस हिस्सा है।
1- मंगल का कोर लगभग 1,800 किलोमीटर चौड़ा है।
2- इसका घनत्व (Density) पृथ्वी के कोर से थोड़ा अलग है।
3- इसमें लोहे (Iron), निकेल (Nickel) और सल्फर (Sulfur) जैसे तत्व पाए जाते हैं।
4-मंगल पर कभी एक मजबूत मैग्नेटिक फील्ड हुआ करता था, लेकिन अब वह खत्म हो चुका है।

पृथ्वी और मंगल के कोर में अंतर
पहलू पृथ्वी का कोर मंगल का कोर
स्थिति बाहरी हिस्सा पिघला हुआ, भीतरी हिस्सा ठोस पूरी तरह ठोस
व्यास ~ 3,500 km ~ 1,800 km
मैग्नेटिक फील्ड आज भी मौजूद अतीत में था, अब नहीं
डायनमो इफेक्ट सक्रिय बंद
यह खोज क्यों है महत्वपूर्ण?
1 ग्रहों का इतिहास समझने के लिए:
मंगल का कोर हमें बताता है कि यह ग्रह कैसे बना, क्यों इसकी सतह पर जीवन की संभावना कम हो गई, और क्यों इसका वातावरण इतना पतला है।
2- भविष्य के मिशन के लिए मददगार:
अगर इंसानों को मंगल पर भेजना है, तो उसके अंदरूनी ढांचे की सही जानकारी बेहद ज़रूरी है।
3- पृथ्वी की तुलना के लिए:
यह जानना कि मंगल का कोर ठोस है, हमें अपने ग्रह की गहराइयों को बेहतर समझने का मौका देता है
पृथ्वी से तुलना: समानताएं और अंतर
पृथ्वी और मंगल की तुलना मजेदार है। पृथ्वी का इनर कोर भी ठोस है, आयरन-निकल से बना, और उसके चारों ओर लिक्विड आउटर कोर है। यह लिक्विड कोर घूमता है, जिससे मैग्नेटिक फील्ड बनती है – जो हमें सोलर विंड से बचाती है। मंगल पर भी अब ठोस इनर कोर मिला है, लेकिन वहां मैग्नेटिक फील्ड नहीं है। क्यों? शायद क्योंकि क्रिस्टलाइजेशन बहुत धीमा है, और कोर में कन्वेक्शन (गर्मी का घूमना) कम है।
क्या मंगल पर जीवन की संभावना है?
यह सवाल हमेशा से वैज्ञानिकों और आम लोगों को उत्साहित करता रहा है। मंगल पर सॉलिड कोर का होना सीधे-सीधे जीवन की संभावना से जुड़ा नहीं है। लेकिन यह बात इस ओर इशारा करती है कि मंगल कभी पृथ्वी जैसा ग्रह रहा होगा – जहाँ गर्मी, चुंबकीय क्षेत्र और स्थिर परिस्थितियाँ मौजूद थीं।
भविष्य में मंगल की खोज कैसे बदलेगी?
वैज्ञानिक अब और ज्यादा एडवांस सीस्मोमीटर मंगल पर भेजने की तैयारी कर रहे हैं।
यूरोप और चीन जैसे देश भी Mars Interior को समझने के लिए मिशन प्लान कर रहे हैं।
यह शोध हमें न सिर्फ मंगल बल्कि अन्य ग्रहों जैसे शुक्र (Venus) और बुध (Mercury) के बारे में भी जानकारी देगा।
चुनौतियां और आगे की राह में अंतरिक्ष विज्ञान पर असर
बेशक, सब कुछ परफेक्ट नहीं है। स्टडी में इस्तेमाल किए गए भूकंप कमजोर थे, और डेटा लिमिटेड है। पहले की स्टडीज में कोर को पूरी तरह लिक्विड माना जाता था क्योंकि वहां लाइट एलिमेंट्स ज्यादा हैं, जो ठोस बनने नहीं देते।
1– इससे ग्रह विज्ञान (Planetary Science) का एक नया अध्याय खुल गया है।
2 वैज्ञानिक अब मंगल को सिर्फ एक बंजर ग्रह नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक प्रयोगशाला मान रहे हैं।
3– भविष्य में अगर इंसान वहाँ बसते हैं, तो यह जानकारी उन्हें सुरक्षित घर और कॉलोनी बनाने में काम आएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)?
Q1: Marsquake क्या है?
Ans: यह मंगल ग्रह पर आने वाले भूकंप जैसे झटके हैं, जो ग्रह के अंदरूनी दबाव से पैदा होते हैं।
Q2: मंगल का कोर कैसा है?
Ans: मंगल का कोर ठोस (Solid) है, जिसमें आयरन, निकेल और सल्फर जैसे तत्व पाए जाते हैं।
Q3: पहले क्या माना जाता था?
Ans: पहले माना जाता था कि मंगल का कोर पूरी तरह पिघला हुआ होगा।
Q4: NASA का कौन सा मिशन इसमें शामिल था?
Ans: InSight Lander मिशन, जिसने 2018 से मंगल की सतह पर डेटा इकट्ठा किया।

Disclaimer:
इस लेख में दी गई जानकारी वैज्ञानिक रिपोर्ट्स और रिसर्च पर आधारित है। इसका उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी साझा करना है। किसी भी तरह की तकनीकी या शोध संबंधी पुष्टि के लिए आधिकारिक स्रोतों और विशेषज्ञों की सलाह लें।
निष्कर्ष: मंगल हमें क्या सिखाता है?
इनसाइट जैसे मिशन्स से हम ग्रहों के दिल तक पहुंच रहे हैं। मंगल का ठोस कोर हमें बताता है कि ग्रह कैसे जन्म लेते हैं, विकसित होते हैं, और मरते हैं। पृथ्वी की तरह मंगल भी एक जीवंत ग्रह था, लेकिन अब शांत। इससे हमें अपनी पृथ्वी की कीमत समझ आती है – उसकी मैग्नेटिक फील्ड, पानी, और जीवन।
ठीक पृथ्वी की तरह। यह खोज न सिर्फ वैज्ञानिकों के लिए अहम है बल्कि पूरे मानव सभ्यता के लिए रोमांचक है, क्योंकि इससे यह साबित होता है कि मंगल एक समय पृथ्वी जैसा सक्रिय ग्रह रहा होगा।
