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साइबर अटैक के बाद Marks & Spencer ने तोड़ा TCS से रिश्ता – जानिए पूरा मामला!

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साइबर अटैक के बाद Marks & Spencer ने तोड़ा TCS से रिश्ता – जानिए पूरा मामला!ब्रिटेन की दिग्गज रिटेल कंपनी Marks & Spencer (M&S) ने हाल ही में एक बड़ा कदम उठाया है। कंपनी ने अपने IT सर्विस डेस्क का कॉन्ट्रैक्ट भारतीय IT दिग्गज Tata Consultancy Services (TCS) के साथ खत्म कर दिया है। यह निर्णय उस बड़े साइबर अटैक के बाद लिया गया है जिसने कंपनी की ऑनलाइन और आंतरिक सिस्टम को बुरी तरह प्रभावित किया था।
साइबर हमले जैसी घटनाएं हमें सोचने पर मजबूर कर देती हैं। कल्पना कीजिए, आपका पसंदीदा शॉपिंग ब्रैंड अचानक ठप हो जाए – न ऑनलाइन ऑर्डर, न ऐप काम करे, और ऊपर से करोड़ों का नुकसान। यही कुछ हुआ ब्रिटिश रिटेल चेन मार्क्स एंड स्पेंसर (एम एंड एस) के साथ। अप्रैल 2025 में एक बड़े साइबर हमले ने कंपनी को हिला दिया, और अब खबर आ रही है कि उन्होंने भारतीय आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) के साथ अपना आईटी सर्विस डेस्क कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया है। ये सिर्फ़ एक कॉन्ट्रैक्ट ब्रेकअप नहीं, बल्कि साइबर सिक्योरिटी, आउटसोर्सिंग और बिज़नेस ट्रस्ट की एक बड़ी कहानी है। Marks & Spencer Marks & Spencer ने अचानक क्यों तोड़ा TCS से रिश्ता?
Marks & Spencer के अनुसार, हाल ही में हुए साइबर अटैक ने उनके डिजिटल ऑपरेशन को बुरी तरह प्रभावित किया। इस हमले के दौरान कंपनी के कई कस्टमर डेटा, लॉगिन डिटेल्स, और इंटरनल कम्युनिकेशन सिस्टम्स हैकर्स के निशाने पर आ गए।हालांकि कंपनी ने तुरंत अपने सिस्टम्स को सुरक्षित करने की कोशिश की और यूजर्स को सूचित भी किया, लेकिन इस हमले ने कंपनी की साइबर सुरक्षा रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए।2025 के ईस्टर वीकेंड पर, एम एंड एस को एक सोफिस्टिकेटेड रैनसमवेयर अटैक का सामना करना पड़ा। ये हमला इतना तगड़ा था कि कंपनी का पूरा ऑनलाइन सिस्टम ठप हो गया। ग्राहक ऑर्डर नहीं प्लेस कर पा रहे थे, गिफ्ट कार्ड्स काम नहीं कर रहे थे, और यहां तक कि स्टोर ऑपरेशंस भी प्रभावित हुए। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमले की शुरुआत फरवरी 2025 में ही हो गई थी, जब हैकर्स ने कंपनी के सिस्टम में घुसपैठ की। उन्होंने विंडोज़ क्रेडेंशियल्स चुराए, एक्टिव डायरेक्टरी को टारगेट किया, और फिर रैनसमवेयर डिप्लॉय किया।

साइबर हमले ने तोड़ा एम एंड एस और टीसीएस का रिश्ता!
अप्रैल 2025 में एक रैनसमवेयर हमले ने एम एंड एस को हिलाकर रख दिया। ऑनलाइन ऑर्डर्स बंद, स्टोर्स में दिक्कत, और £300 मिलियन का नुकसान। इसके बाद कंपनी ने टीसीएस के साथ 15 साल पुराना कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिया। टीसीएस का कहना है कि वो सिर्फ सर्विस डेस्क मैनेज करते थे, सिक्योरिटी नहीं। लेकिन एम एंड एस अब कोई रिस्क नहीं लेना चाहती। क्या ये भारतीय आईटी कंपनियों के लिए खतरे की घंटी है? ग्राहकों का भरोसा कैसे वापस जीता जाएगा?

साइबर हमले की मार: एम एंड एस ने टीसीएस को दिखाया बाहर का रास्ता!
अप्रैल 2025 का साइबर हमला एम एंड एस के लिए बुरा सपना बन गया। हैकर्स ने सिस्टम हैक कर लिया, और ग्राहकों का डेटा खतरे में पड़ गया। इसके बाद कंपनी ने टीसीएस के साथ कॉन्ट्रैक्ट तोड़ दिया। टीसीएस का दावा है कि वो सिर्फ सर्विस डेस्क हैंडल करते थे। लेकिन एम एंड एस अब इन-हाउस सिक्योरिटी पर ज़ोर दे रही है। ये घटना रिटेल और आईटी सेक्टर के लिए बड़ा सबक है। क्या अब साइबर सिक्योरिटी को हल्के में लिया जाएगा?

M&S का नया कदम – इन-हाउस सर्विस टीम!
M&S अब अपने IT सपोर्ट और सर्विस डेस्क ऑपरेशन्स को इन-हाउस टीम के ज़रिए मैनेज करने जा रही है। कंपनी का मानना है कि इससे उन्हें ज्यादा कंट्रोल, डेटा प्राइवेसी और फास्ट रिस्पॉन्स मिलेगा।
कंपनी ने यह भी बताया कि वे आने वाले महीनों में सैकड़ों नए IT और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की भर्ती करने वाली है।
M&S का यह कदम दिखाता है कि आज के डिजिटल युग में बड़ी कंपनियां भी थर्ड पार्टी सर्विस प्रोवाइडर्स पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना चाहतीं।

TCS की भूमिका पर उठे सवाल!
Tata Consultancy Services (TCS) पिछले कई वर्षों से Marks & Spencer को IT सर्विस डेस्क, क्लाउड सपोर्ट, और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर मैनेजमेंट जैसी सेवाएं दे रही थी।
M&S का कहना है कि यह अटैक सीधे तौर पर TCS की गलती नहीं था, लेकिन कंपनी अब अपनी IT सर्विस और सिक्योरिटी ऑपरेशन को इंटरनल टीम के हाथों में देना चाहती है।

टीसीएस का पक्ष: इनकार और सफ़ाई!
टीसीएस ने इन रिपोर्ट्स को सिरे से खारिज कर दिया। कंपनी ने स्टेटमेंट जारी कर कहा, “हम एम एंड एस को साइबर सिक्योरिटी सर्विसेज नहीं देते थे। हमारा कॉन्ट्रैक्ट सिर्फ़ सर्विस डेस्क था, जो हमले से पहले ही एंड होने वाला था।” टीसीएस के चेयरमैन एन चंद्रसेकरन ने भी क्लैरिफिकेशन दी कि ये रूटीन चेंज था, न कि पनिशमेंट। उनका कहना है कि एम एंड एस की सिक्योरिटी टीसीएस के स्कोप से बाहर थी।इंडस्ट्री एक्सपर्ट्स मिश्रित राय रखते हैं। एक तरफ़, टीसीएस जैसी कंपनियां अक्सर ‘ब्लेम गेम’ खेलती हैं। दूसरी तरफ़, आउटसोर्सिंग में सिक्योरिटी गैप्स कॉमन हैं। एक रिपोर्ट में कहा गया कि 70% साइबर अटैक्स थर्ड-पार्टी वेंडर्स से होते हैं। तो, क्या एम एंड एस ने जल्दबाज़ी की? या टीसीएस को सबक मिलना चाहिए?

साइबर अटैक का असर – ग्राहक और कंपनी दोनों पर!
2025 में रिटेल सेक्टर में साइबर अटैक्स की बाढ़ आ गई। अप्रैल में ही को-ऑप को भी हिट किया गया, लेकिन उनकी रिकवरी तेज़ थी क्योंकि उन्होंने इन-हाउस सिक्योरिटी पर फोकस किया था। एडिडास और हैरोड्स जैसी कंपनियां भी टारगेट बनीं। कुल मिलाकर, रिटेलर्स को £1 बिलियन से ज़्यादा का नुकसान हुआ।एम एंड एस के पास 30 मिलियन कस्टमर्स हैं, और डेटा ब्रीच ने प्राइवेसी लॉज (जैसे GDPR) के उल्लंघन का डर पैदा कर दिया। कंपनी को फाइन का सामना करना पड़ सकता है। स्टॉक प्राइस में 5% गिरावट आई, और सीईओ पर प्रेशर बढ़ा।
साइबर अटैक के कारण Marks & Spencer की कस्टमर सर्विस, ऑनलाइन ऑर्डर्स और ईमेल सिस्टम प्रभावित हुए थे। कई ग्राहकों ने शिकायत की कि उन्हें ऑर्डर अपडेट्स या रिटर्न रिक्वेस्ट की जानकारी समय पर नहीं मिल पा रही थी।

क्यों जरूरी है साइबर सिक्योरिटी पर फोकस?
आज के दौर में लगभग हर कंपनी का बिजनेस ऑनलाइन है। बैंकिंग, शॉपिंग, कस्टमर सपोर्ट — सब कुछ डिजिटल हो चुका है।
लेकिन इसी के साथ साइबर अटैक का खतरा भी कई गुना बढ़ गया है।
M&S का यह मामला एक सख्त चेतावनी है कि बड़ी से बड़ी कंपनियां भी साइबर क्राइम से सुरक्षित नहीं हैं।
अगर सिक्योरिटी में थोड़ी सी भी लापरवाही होती है, तो उसका नुकसान करोड़ों में हो सकता है।

ब्रिटेन में साइबर अटैक के बढ़ते मामले!
ब्रिटेन में हाल के महीनों में कई बड़ी कंपनियों और सरकारी एजेंसियों पर साइबर अटैक हुए हैं।
2025 में ही अब तक 200 से ज्यादा बड़े डेटा ब्रीच दर्ज किए जा चुके हैं।
साइबर सिक्योरिटी एजेंसियों का कहना है कि हैकर्स अब AI टूल्स और ऑटोमेशन का इस्तेमाल कर हमलों को और तेज बना रहे हैं।
M&S पर हुआ यह हमला भी इसी ट्रेंड का हिस्सा माना जा रहा है, जिससे यह साबित होता है कि अब कंपनियों को Reactive नहीं, Proactive होकर अपनी सुरक्षा करनी होगी।

भारतीय IT इंडस्ट्री पर क्या असर पड़ेगा?
भारत की IT इंडस्ट्री दुनिया की सबसे बड़ी आउटसोर्सिंग इंडस्ट्री में से एक है।
TCS, Infosys, Wipro जैसी कंपनियां हर साल अरबों डॉलर का बिजनेस करती हैं।
M&S-TCS विवाद ने यह दिखाया है कि विदेशी कंपनियां अब सिर्फ कॉस्ट-इफेक्टिव सॉल्यूशंस नहीं चाहतीं, बल्कि सिक्योरिटी और ट्रस्ट को भी प्राथमिकता दे रही हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)?
1. Marks & Spencer ने Tata Consultancy Services (TCS) से कॉन्ट्रैक्ट क्यों खत्म किया?
Marks & Spencer ने हाल ही में हुए एक बड़े साइबर अटैक के बाद TCS के साथ अपना IT सर्विस डेस्क कॉन्ट्रैक्ट खत्म किया। कंपनी अब अपनी IT सर्विस इन-हाउस संभालना चाहती है ताकि सुरक्षा और कंट्रोल दोनों अपने हाथ में रहें।

2. क्या साइबर अटैक की जिम्मेदारी TCS पर थी?
नहीं, कंपनी ने यह स्पष्ट किया है कि अटैक के लिए TCS सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं थी। लेकिन इस घटना के बाद M&S ने फैसला किया कि अब IT ऑपरेशन खुद के अंदर रखना ज्यादा सुरक्षित होगा।

3. साइबर अटैक में क्या नुकसान हुआ?
इस हमले में Marks & Spencer की वेबसाइट और ईमेल सिस्टम कुछ घंटों के लिए बंद रहे। ग्राहकों को ऑर्डर अपडेट और लॉगिन में परेशानी आई। हालांकि कंपनी ने कहा कि कोई बड़ा डेटा लीक नहीं हुआ।

4. अब M&S अपनी IT सर्विस कैसे संभालेगी?
M&S ने घोषणा की है कि वह अब अपनी IT सर्विस और सिक्योरिटी सिस्टम को खुद मैनेज करेगी। इसके लिए कंपनी ने नए साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स और IT स्टाफ की भर्ती शुरू की है।

5. क्या Marks & Spencer और TCS के बीच रिश्ता पूरी तरह खत्म हो गया है?
नहीं, फिलहाल केवल IT सर्विस डेस्क कॉन्ट्रैक्ट खत्म हुआ है। अन्य टेक्निकल और एनालिटिक्स प्रोजेक्ट्स में TCS की भूमिका अभी भी बनी हुई है।➡️
Marks & Spencer का यह निर्णय निश्चित रूप से एक बड़ा बदलाव है।
साइबर अटैक ने कंपनी को यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि डेटा सुरक्षा और डिजिटल कंट्रोल बाहरी हाथों में देना कितना जोखिम भरा हो सकता है।
TCS के लिए यह नुकसान भले ही एक कॉन्ट्रैक्ट का हो, लेकिन यह घटना पूरे IT सेक्टर के लिए एक चेतावनी है कि आज का दौर सिर्फ टेक्नोलॉजी का नहीं, बल्कि सिक्योरिटी और ट्रस्ट का भी है।

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