Site icon

भारत-रूस की दोस्ती से अमेरिका क्यों बौखलाया? ट्रंप को क्यों हुआ झटका?

ghgh

भारत और रूस की दोस्ती  वैश्विक राजनीति में भारत रूस दोस्ती  और दुश्मनी की लकीरें अक्सर बदलती रहती हैं। हाल ही में भारत और रूस की मजबूत साझेदारी ने अमेरिका को खासा परेशान कर दिया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सलाहकार पीटर नवरो ने भारत को चेतावनी तक दे डाली। यह घटना न केवल भारत-अमेरिका रिश्तों में तनाव ला रही है, बल्कि दुनिया को यह भी दिखा रही है कि भारत अपनी स्वतंत्र विदेश नीति पर अडिग है।

भारत-रूस की दोस्ती से अमेरिका क्यों बौखलाया? ट्रंप को क्यों हुआ झटका?

भारत रूस दोस्ती आज भारत और रूस न सिर्फ दोस्त हैं बल्कि रणनीतिक साझेदार भी हैं। ऊर्जा, रक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों ने कई समझौते किए हैं।भारत रूस दोस्ती से अमेरिका इस साझेदारी को संदेह की नजर से देखता है। भारत  रूस की दोस्ती  से लगता है कि भारत उसकी ओर झुकने के बजाय रूस के साथ ज्यादा जुड़ रहा है। भारत रूस दोस्ती क  यही कारण है कि अमेरिका बार-बार चेतावनी देता रहता है।

 

अमेरिका को क्यों चुभ रही है रूस संग भारत की नजदीकी?भारत-रूस की दोस्ती 

भारत  रूस की दोस्ती की नजदीकी अमेरिका को इसलिए चुभ रही है क्योंकि वह चाहता है कि भारत उसकी नीतियों का पालन करे। लेकिन भारत रूस दोस्ती  ने साफ कर दिया है कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है। भारत  रूस की दोस्ती  के साथ दोस्ती भारत के लिए रणनीतिक और आर्थिक दोनों ही लिहाज से फायदेमंद है। यही बात अमेरिका को परेशान करती है।

भारत रूस दोस्ती  की दशकों पुरानी दोस्ती
1भारत  रूस की दोस्ती  (पहले सोवियत संघ) का रिश्ता कोई नया नहीं है, बल्कि कई दशक पुराना है।
2 1947 में आजादी के बाद से ही रूस भारत का भरोसेमंद साथी रहा।
3 1971 के भारत-पाक युद्ध में सोवियत संघ ने संयुक्त राष्ट्र में भारत का समर्थन किया, जबकि अमेरिका और चीन पाकिस्तान के पक्ष में थे।
4 भारत के 70% से ज्यादा हथियार और रक्षा उपकरण आज भी रूस से आते हैं।
5 2021 में भारत रूस दोस्ती से तेल आयात केवल 3% था, लेकिन 2024 तक यह 35-40% तक पहुंच गया।
6 यानी भारत-रूस के रिश्ते केवल कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि रक्षा, ऊर्जा और भरोसे पर टिके हैं।

भारत रूस दोस्ती  रिश्तों का नया अध्याय
भारत  रूस की दोस्ती पिछले कुछ सालों में भारत और रूस के रिश्ते और गहरे हुए हैं। चाहे तेल खरीदना हो या रक्षा सौदे, भारत ने रूस का साथ दिया है। दोनों देशों के बीच यह नया अध्याय दिखाता है कि यह दोस्ती सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि भरोसे पर टिकी है। यह साझेदारी भविष्य में और मजबूत होगी।

भारत-रूस की दोस्ती पर क्यों चिढ़ा अमेरिका?
भारत  रूस की दोस्ती कोई आज की नहीं बल्कि दशकों पुरानी है। रूस हमेशा भारत का भरोसेमंद साथी रहा है – चाहे रक्षा सौदे हों या मुश्किल वक्त में समर्थन। हाल के दिनों में भारत ने रूस से तेल और हथियार खरीदकर यह साबित किया कि वह अपने राष्ट्रीय हितों से पीछे नहीं हटेगा। यही बात अमेरिका को सबसे ज्यादा चुभ रही है।
अमेरिका चाहता है कि भारत रूस से दूरी बनाए, लेकिन भारत ने साफ कह दिया है कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है। यही कारण है कि भारत-रूस की दोस्ती अमेरिका के लिए सिरदर्द बनी हुई है।

भारत-रूस की दोस्ती: अमेरिका क्यों परेशान?
भारत रूस की दोस्ती बहुत पुरानी है। रक्षा सौदों से लेकर ऊर्जा व्यापार तक, दोनों देशों ने हमेशा एक-दूसरे का साथ दिया है। यही कारण है कि अमेरिका को यह रिश्ता खटक रहा है। अमेरिका चाहता है कि भारत पूरी तरह उसके साथ खड़ा हो, लेकिन भारत अपने हितों को ध्यान में रखता है।भारत  रूस की दोस्ती  यही स्वतंत्र नीति अमेरिका के लिए परेशानी बन गई है।
डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में “अमेरिका फर्स्ट” नीति हावी रही।
भारत पर 25% टैरिफ लगाए गए।
रूस से तेल और हथियार खरीदने पर पेनल्टी की धमकी दी गई।
ट्रंप सलाहकार पीटर नवरो ने कहा कि भारत को अमेरिका के साथ रहना चाहिए, रूस के साथ नहीं।
लेकिन भारत ने साफ कह दिया कि उसका रिश्ता रूस के साथ “समय-परीक्षित” है और वह अपने राष्ट्रीय हितों से पीछे नहीं हटेगा

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)❓
1 भारत रूस से क्या-क्या खरीदता है?
 भारत रूस से तेल, गैस, हथियार और रक्षा तकनीक खरीदता है।
2. क्या भारत-अमेरिका रिश्ते खराब हो सकते हैं?
 अगर अमेरिका दबाव बनाता रहा तो रिश्तों में खटास आ सकती है, लेकिन भारत अभी भी  दोनों के साथ संतुलन बनाए रख रहा है।
3.  भारत और रूस की दोस्ती इतनी मजबूत क्यों है? क्योंकि यह रिश्ता दशकों पुराना है। रक्षा, ऊर्जा और संकट के समय रूस ने हमेशा भारत का  साथ दिया है  क्या भारत अमेरिका की बात मान लेगा नहीं, भारत साफ कर चुका है कि वह अपने हितों के लिए ही फैसले लेगा।
 4. भारत और रूस की दोस्ती  के साथ भारत का कौन-सा बड़ा समझौता हुआ है?
     रक्षा सौदे और तेल खरीद सबसे अहम समझौते रहे हैं।

हाल के बड़े उदाहरण
S-400 डील: भारत ने रूस से एयर डिफेंस सिस्टम खरीदा, जिस पर अमेरिका ने आपत्ति जताई।
तेल व्यापर: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद भारत ने सस्ता रूसी तेल खरीदा और अपनी अर्थव्यवस्था को मजबूत किया।
अंतरिक्ष सहयोग: गगनयान मिशन में भी रूस अहम भूमिका निभा रहा है।

रूस संग भारत की बढ़ती साझेदारी पर अमेरिका की टेढ़ी नज़र
भारत  रूस की दोस्ती आज भारत और रूस की दोस्ती  बल्कि रणनीतिक साझेदार भी हैं। ऊर्जा, रक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों ने कई समझौते किए हैं। अमेरिका इस साझेदारी को संदेह की नजर से देखता है। उसे लगता है कि भारत उसकी ओर झुकने के बजाय रूस के साथ ज्यादा जुड़ रहा है। यही कारण है कि अमेरिका बार-बार चेतावनी देता रहता है।
आज भारत और रूस न सिर्फ दोस्त हैं बल्कि रणनीतिक साझेदार भी हैं। ऊर्जा, रक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों ने कई समझौते किए हैं। अमेरिका इस साझेदारी को संदेह की नजर से देखता है। उसे लगता है कि भारत उसकी ओर झुकने के बजाय रूस के साथ ज्यादा जुड़ रहा है। यही कारण है कि अमेरि का बार-बार चेतावनी देता रहत

अमेरिका क्यों डर रहा है?
भारत और रूस की दोस्ती रक्षा बाजार – अगर भारत रूस से हथियार लेता रहा तो अमेरिकी कंपनियों को बड़ा मार्केट नहीं मिलेगा।
ऊर्जा – सस्ता रूसी तेल खरीदकर भारत अपनी अर्थव्यवस्था को बचा रहा है, जिससे अमेरिका का दबाव कम हो जाता है।
ग्लोबल इमेज – भारत की स्वतंत्र विदेश नीति अमेरिका की सुपरपावर छवि को चुनौती देती है।

भारत का रुख
भारत और रूस की दोस्ती ने हमेशा अपनी विदेश नीति को स्वतंत्र रखा है। वह किसी गुट या संगठन (जैसे NATO) का हिस्सा नहीं है और किसी भी देश का जूनियर पार्टनर नहीं बनना चाहता।
भारत का संदेश साफ है – “हम अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देंगे।”
रूस संग भारत की बढ़ती साझेदारी पर अमेरिका की टेढ़ी नज़र
आज भारत और रूस न सिर्फ दोस्त हैं बल्कि रणनीतिक साझेदार भी हैं। ऊर्जा, रक्षा और तकनीक जैसे क्षेत्रों में दोनों ने कई समझौते किए हैं। अमेरिका इस साझेदारी को संदेह की नजर से देखता है। उसे लगता है कि भारत उसकी ओर झुकने के बजाय रूस के साथ ज्यादा जुड़ रहा है। यही कारण है कि अमेरिका बार-बार चेतावनी देता रहता है।

निष्कर्ष
भारत-रूस की दोस्ती अमेरिका की परेशानी बढ़ा रही है, लेकिन यही भारत की ताकत भी है। ट्रंप सलाहकार का बयान चाहे जितना तीखा हो, भारत अपनी नीति से पीछे नहीं हटेगा। भारत  रूस की दोस्ती  आने वाले समय में बातचीत जरूर होगी, लेकिन भारत-रूस की दोस्ती बनी रहेगी और अमेरिका को इस नई हकीकत को स्वीकार करना ही होगा।

Exit mobile version